कृषि कानून 2020

आजकल केन्द सरकार ने नये कृषि कानून 2020 पास किये उसके ऊपर बहस और परदर्शन  हो रहे है। इसके आलावा सरकार की ओपन इकॉनमी की पालिसी का भी विरोध हो रहा है। 

18 मई  2016 की इकनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार जब रिपोर्टर ने मिनिस्टर एग्रीकल्चर कांसुलर अमेरिका के साथ  अमेरिकन  एम्बेसी इंडिया में बातचीत की उस समय अमेरिकन एग्रीकल्चर कांसुलर ने कहा कि इंडिया को अपना एग्रीकल्चर सेक्टर अमेरिकन इन्वेस्टर्स लिया खोलना चाइये। 

अमेरिका  में पोल्ट्रीु उत्पादन बहुत हो रहा और बहुराष्ट्रीय कम्पनीज अपने उत्पादन भारत में बेचना चाहते है. 

वेस्टर्न वर्ल्ड में चिकन का ब्रैस्ट पीस  को पसंद किया जाता है और लेग पीस  को पसंद नहीं  करते क्योंकि ब्रैस्ट पीस  ज्यादा  नुट्रिशन है. इस कारक चिकन लेग्स उनके लिए फालतू है. अब यह जो फालतू चिकन लेग पीस के उत्पाधन को कहां बेचा जाये. अब  इन  बहुराष्ट्रीय कम्पनीज को भारत एक बड़ी मार्किट दिखती है .

इस से भारत के उत्पाधको को अपना माल भारत में बेचने में मुश्किल आएगी  और ठीक रेट भी नहीं मिलेगा

मेरा मानना ये है की भारत की जयादा आबादी भारत के लिए समस्या पर इन विदेशी कम्पनीज को अपना माल बेचना के लिए भारत की आबादी एक वरदान हैं .

 2018 से  अब अमेरिका से चिकन  लेग पीस  भारत में आयात होना शुरू हो गया 25% ड्यूटी लगाके.पर अमेरिकन कम्पनीज  10 % पर जोर  लगा रही है. अब भारत का पोल्ट्री उद्योग का नुक्सान होगा. जब सस्ता इम्पोर्ट होगा तब स्थानीय उत्पादों का सही रेट नहीं मिलेगा और इससे लघु उद्योगों का नुक्सान व् ग्रामीण रोज़गार की कमी आएगी 

सितम्बर 2019  के अंतिम सप्ताह में मोदी साहिब अमेरिका का सात दिनों का दौरा किया। 

उस समय मोदी साहिब की बहुत सारी अमेरिकन कम्पनीज के सीईओ से बातचीत की इन्वेस्टमेंट इन इंडिया।  भारत की इकनोमिक ग्रोथ के लिए बहुत अच्छी बाते है।  पर भारत का लघु उद्योग ,ग्रामीण रोज़गार का नुक्सान हो यह बात भी ठीक नहीं।  कृषि भारत का प्रधान धंधा है।  बहुत सारे किसान कृषि के  आलावा पोल्ट्री और डेरी का भी काम करते है।  इनके हितों का भी ध्यान रखना चाइये 

04 नवंबर 2019  को इंडिया ने RCEP (Regional comprehensive economic partnership ) से बाहर निकलना का फैसला किया।  इंडिया का कहना की चीन भारत में सस्ता सामान डंप करेगा और ऑस्ट्रियला व नई नूज़ीलैण्ड भारत में डेरी उत्पादन भारत में एक्सपोर्ट करेगा जिससे भारत की  लोकल मार्किट का नुक्सान होगा। आलोचकों के अनुसार भारत अमेरिका के साथ व्यापार करने का मन बना चुका था। 

24 फरवरी 2020 को अमेरिका के राष्ट्र्पति ट्रम्प साहिब भारत आये।  ट्रम्प साहिब के दौरे के समय भारत व् अमेरिका के बीच व्यापारसमझोता के बारे में बातचीत हुई.  उस समय भी किसानो के संघ ने प्रदर्शन किये

अमेरिका में बड़े बड़े डेरी फार्म जिनके पास हजारों की संख्या में गायें रखी हुई है और डेरी उत्पादन बहुतात में  होता है  डेरी फार्मिंग कम्पनीज की भारत के बाजार पर नज़र है.  भारत में जयादातर  छोटे डेरी फार्म्स है

बहुत से किसान भाइयो ने कृषि के साथ साथ छोटे छोटे डेरी फार्म्स या पोल्ट्री फार्म्स है. मेरा मानना की कृषि, पोल्ट्री और डेरी फार्मिंग का आपस में गहरा सम्बन्ध है. जब बाहर से डेरी प्रोडक्ट्स भारत आएंगे  तो सथानीय उत्पातक को सही रेट नहीं मिलेगा. एक तरफ भारत RCEP से इस करके बाहर  हुआ की ऑस्ट्रिलया  और  नूज़ीलैण्ड अपने डेरी प्रोडक्ट्स को भारत में डंप ना करे दूसरी तरफ पश्चिम की तरफ बढ़ रहा है। 

अंत में मैं यह   यह कहना चाहता की बहुराष्ट्रीय कम्पनीज  भारत के इन्फ्रास्ट्रचर , परिवहन ,आईटी ,टेलीकम्यूनिकेशन व् फाइनेंस में अच्छा योगदान कर रही .  पर यदि बहुराष्ट्रीय कम्पनीज  भारत के ग्रामीण कारोबार में हस्तक्षेप करेगी उस से छोटे किसानो का  और छोटे व्यापारी का नुक्सान होगा क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान और ग्रामीण लोग बिज़नेस के इतने कुशल नहीं है. भारत सरकार इन ग्रामीण उद्योगों को बचाना के लिए बहुराष्ट्रीय  विदेशी कम्पनीज को भारत में सस्ता निर्यात न करने दे। 

धन्यवाद